## पिता की याद
कुमार विश्वास की प्रसिद्ध कविता “पिता की याद” हर बेटे की आँखों में आंसू ला देती है।
फिर पुराने नीम के नीचे खड़ा हूँ
फिर पिता की याद आई है मुझे
नीम सी यादें हृदय में चुप समेटे
चारपाई डाल आंगन बीच लेटे
सोचते हैं हित सदा उनके घरों का
दूर है जो एक बेटी चार बेटे
कुमार विश्वास कहते हैं कि पिता धर्म, स्वर्ग और परम तप हैं।
पिता के बारे में अन्य कविताएँ
| कवि | कविता का नाम | मुख्य भाव |
| ओम व्यास | पिता जीवन है, संबल है, शक्ति है | जीवन का सहारा
| दीनदयाल शर्मा | किससे पूछूं पापा | बच्चों की जिज्ञासा
| मुनव्वर राना | पिता पर शायरी | जरूरत का पहाड़
1. पिता कंधे पर बैठकर मेला दिखाते हैं।
2. मां चलना सिखाती है, पापा खड़ा होना।
3. पिता नहीं तो बचपन अनाथ है।
4. मां-बाप की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है।
5. पिता की झुर्रियां ही रिश्तों की किताब हैं।
पिता परमात्मा की जगत के प्रति आसक्ति है